कंप्यूटर बदल रहा है हमारे सपने, हमारी सोच
मुंबई में एक छोटा-सा गांव है कल्याण। लगभग एक दशक पहले तक इस गांव में एक भी टेलीफोन नहीं था। साथ ही केवल एक ही सेकेंडरी स्कूल था। सन् 2001 में एक गैर सरकारी संगठन की मदद से इस स्कूल को एक कंप्यूटर गिफ्ट के रूप में मिला।
इस स्कूल के छात्रों ने इससे पहले कभी कंप्यूटर का नाम तक नहीं सुना था। जब स्कूल की ही एक लड़की श्रद्धा डिंबले को की बोर्ड का इस्तेमाल करते हुए अपना नाम लिखने के लिए कहा गया तो लड़की को पसीना आ गया। वह बुरी तरह नर्वस हो गयी।
लेकिन स्कूल में कंप्यूटर की एंट्री के कुछ ही महीने बाद एक अमेरिकन न्यूज चैनल की टीम उस गांव में पहुंची। उन लोगों को यह देख कर बेहद आश्चर्य हुआ कि श्रद्धा बेहद सहजता से कंप्यूटर को ऑपरेट कर रही है। उन लोगों को तब और भी आश्चर्य हुआ, जब श्रद्धा ने उन्हें बताया कि उसने कम्प्यूटर पहली बार कुछ माह पहले ही देखा था।
इस कंप्यूटर ने दिलचस्प रूप से श्रद्धा के सपने भी बदल दिये। श्रद्धा ने इस अमेरिकन टीम को बताया कि वह कंप्यूटर टीचर बनना चाहती हैं।